Krishna Janmashtami kyon aur kab manaee jaatee hai ?

भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग मे मथुरा के काराग्रह मे हुआ था. भगवान श्री कृष्ण के माता पिता का नाम देवकी एवम वासुदेव था. भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मे कृष्ण पछ की अश्ट्मी तिथि को रोहीणी नछ्त्र मे मध्य रात्रि को हुआ था .जिस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था उस दिन को हम कृष्ण जन्माष्टमी के रुप मे बडे धुम धाम से पुरे देश मे मनाते है. Krishna Janmashtami के दिन देश भर के सारे मन्दिरो को सजाया जाता है.
Krishna-Janmashtami
Lord krishna के जन्म के समय क्या - क्या प्राकृतिक घट्ना घटीत होती है?
भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय घंघोर काली रात थी काले बादल आसमान मे छाये हुये थे बिजली कड्क रही थी, तथा तेज हवाये बह रही थी. देवकी और वासुदेव कारागार मे सोये हुये थे, दोनो ही लोहे की जंजीरो मे जकडे हुये थे, कंश के सैनीक दिन रात दोनो पर अपनी निगरानी रखते थे पर जैसे ही श्री कृष्ण जी का जनम होता है सारे प्रहरी बेसुद होकर सो जाते है, वासुदेव की जनजीरे स्वत: ही खुल जाती है जेल के ताले भी स्वत: ही खुल जाते है और वासुदेव अपनी गोद मे श्री कृष्ण जी को लेकर नंद राय जी के घर गोकुल की ओर स्वत: ही चल पड्ते है. तेज  बारीश भी हो रही होती है बारिश से बचाने हेतु shesh naag छीर सागर छोड यमुना जी मे फन धारण कर कृष्ण की छतरी बन जाते है Yamuna जी का जल स्तर भी काफी उफान पर होता है नदी मे जलधारा का प्रवाह भी बहुत तेज होता है. जैसे ही वासुदेव जी यमुना जी के पास पहुचते है उनको एक लकडी का बना सुप मिलता है जिसमे कृष्ण जी को रख कर नदी पार करने लगते है जैसे - जैसे वासुदेव नदी की गहराई मे बड्ते जाते है जल स्तर भी बड्ता जाता है एक समय ऐसा भी होता है कि नदी की जल धारा वासुदेव जी की नासीका तक पहुच जाती है पर जैसे ही कृष्ण जी का पाव जल को स्पर्श करता है जल स्तर कम हो जाता है और vasudev krishna को लेकर आसानी से यमुना जी को पार कर नंद गाव पहुच नंद राय के घर कृष्ण जी को रख देते है और वहा से बदले मे यसोदा जी की पुत्री को लेकर पुन: वापस आ जाते है और फिर सारी स्थिति Normal हो जाती है यानि कि प्रहरी निंद से जाग जाते है जेल के ताले स्वत: ही लग जाते है वासुदेव लोहे की जंजीरो मे जकड जाते है और प्राकृति भी शांत हो जाती है.

देवकी और वासुदेव कौन थे?
महाराजा उग्रसेन और रानी पदमावती की पुत्रि देवकी थी. महाराजा का एक जेश्ट पुत्र भी था जिसका नाम कंश था और वासुदेव यदुवंशी सरदार थे जिनका विवाह राजकुमारी देवकी से हुआ था.

कंश कौन था?
महाराजा Ugrasena और रानी पदमावती का पुत्र था. बाल्यावस्था से ही ये बहुत घमंडी और क्रुर स्वभाव का था. इसके व्यव्हार से राजा उग्रसेन सदेव चिंतित रहते थे . वाणासुर और नरकासुर कंश के साथी थे . कंश अपनी प्रजा पर बहुत अत्याचार करता था वह निर्दोश प्राणियो एवम ऋषि कि निर्मम हत्या करता था. उसे सत्ता पाने की बहुत लाल्सा थी इसीलिये उसने अपने माता पिता को राज्गद्दि से हटा दिया और आजीवन कारागार मे डाल दिया और स्वयम मथुरा का राजा बन गया . राजा बनने के पश्चात वह और ज्यादा अहंकारी और निर्दयी हो गया. लेकिन वह अपनी छोटी बहन से बहुत स्नेह रखता था उसने देवकी और वासुदेव का विवाह भी करवाया था. kansa बहुत शक्तिशाली और अन्न्यायी राजा था.

देवकी और वासुदेव को काराग्रह मे कंश ने क्यों रखा थ?
एक बार जब स्वयम कंश आपनी बहन को वासुदेव के साथ रथ मे उनका सारथी बन कर ससुराल छोड्ने जा रहा था तभी अचानक काले घंघोर बादल आसमान मे छा जाते है बिजली चमकने लगती है और एक आकाशवाणी होती है कि हे कंश जिस बहन को तु उसके ससुराल छोड्ने जा रहा हैं उसी की आठवीं संतान तेरा वध करेगी. ये सुनकर वह बहुत डर जाता है और क्रोध की अगनी मे जल उठता है जिसके उपरांत वह अपनी बहन का वध करने उसकी तरफ बढ़ता है लेकिन वासुदेव उसे ऐसा करने से रोकते है और कहते है कि तुम हम दोनो को काराग्रह मे डाल दो हम आपनी सारी संतनो को एक एक करके तुमहे सौपते रहेगे. ये सुझाव कंश को अच्छा लगता है और दोनो को बन्दी बनाकर जेल मे डाल देता है.

 

नंद राय कौन थे?

नंद राय एक गोवाले थे वह यशोदा मैया के पति थे तथा गाव के सरपंच थे

यशोधरा कौन थी?
यशोधा मैया नंदराय की पत्नि थी तथा श्री कृष्ण जी की मा भी है.

यदुवंशी और चंद्रवंशी का इतिहास क्या है ?

ब्रह्मा जी के मानस पुत्र अत्रि ऋषि का विवाह माता अनुसुया से हुआ जिनकी संतान चंद्रमा हुये चंद्रमा का विवाह ब्र्हस्पति की पत्नी तारा के साथ हुआ जिससे उनहे बुध नाम का पुत्र प्राप्त हुआ, बुध की संतान पुरुरवा हुये जिनका विवाह अपसरा उरवशी से हुआ इंकी 6 पीडी मे राजा यदु हुये ये बहुत तेजसवी एवम महाप्रतापी थे इनही के नाम पर इस का नाम यदुवंशी पडा. चंद्रमा की पीडी चंद्र वनशी कहलायी. कृष्ण इसी वंश की 27 पीडी मे जन्मे थे कृष्ण के पुत्र प्रादुमन और प्रादुमन के पुत्र अनिरुध हुये.  






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