धनतेरस पूजा की विधि

सबसे पहले चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाये और एक जल पात्र से कलश में शुद्ध पानी भरे और उसमें (कलश पर) मौली बांधे फिर फूल द्वारा थोड़ा सा पानी लेकर उसे अपने घर के मंदिर के आसपास की जगह को शुद्ध करें और फिर रंगोली बनाये. रंगोली के बीच में एक बड़ा मिट्टी का दिया कलश के ऊपर रखे .दिये मे तीन बाती रखे. कलश के दाएं और बाएं तरफ छोटे दिये रखे. फिर कलश के ऊपर (यानि की कलश के सामने के तरफ) श्रीयंत्र रखें फिर कलश के उपर रखे दिये मे एक कौड़ी और सिक्के डाले. ये धंवंतरी का रूप है. इसके पश्चात बाजार जाके नये बर्तन एवम सोने – चांदी के सिक्के खरीदे जिनकी दिवाली के दिन पुजा करेगे.


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सूरज अस्त होने के बाद कटोरी मे थोड़ा कुमकुम घोल ले और पुरे परिवार को कुमकुम का टिका लगाये .रंगोली मे रखे छोटे और बडे दिये को जलाये. अब एक कौड़ी को बडे दिये मे डाल दे. फिर कलश पर कुमकुम का टिका लगाये और अछ्त छोडे. अब खिल बतासे कलश के सामने रखे अर्थात चडाये. अब फूल लेकर परिवार वाले भगवान धंवंतरी और माता लक्ष्मी जी को याद करते हुए अपने परिवार की सेहत और तरक्की के लिए प्रार्थना करें और प्रार्थना के बाद फूल दीपक के पास छोड़ दे. इसके बाद एक जले हुए दिये को भगवान कुबेर जी के लिए अपने घर के दरवाजे के पास और दूसरे छोटे दिये को अपने घर के बाहर दक्षिण दिशा की तरफ रखे . फिर कलश मे रखे हुए पानी को अपने घर के दरवाजे के दोनों तरफ छिडक के अंदर आ जाए. कुछ लोग भगवान धनवंतरी के पूजा के बाद श्री गणेश और लक्ष्मी मा की पूजा भी करते हैं.

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