देव शयनी एकादशी 

हिन्दू धर्म में मान्यता है कि आज से भगवान श्री हरि विष्णु जी छीरसागर में अगले ०४ माह के लिए निंद्रा में जाते है. अब कोई भी नया मांगलिक कार्य का शुभारम्भ इन चार माह में हिन्दू मान्यता के अनुसार नहीं होगा. जिस दिन भगवान् Lord Vishnu छीरसागर में निंद्रा के लिए जाते हैं उस दिन को देवशयनी एकादशी कहा जाता है.  इसे  हरि शयनी एकादशी (Hari shyani ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है.
Devshayani-ekadashi
Image Source – Google Image by infinite eyes 


मान्यता है कि आज के दिन स्नान करके भगवन श्री विष्णु जी कि पूजा करने से अधिक पुन्य प्राप्त होता है. आज के दिन भगवान कि उपासना करनी चाहिए और चावल इत्यादि का सेवन करने से बचना चाहिए क्युकी चावल में पानी अधिक पाया जाता है और चंद्रमा जल का स्वामी है , चंद्रमा चंचल और जल भी चंचलता का गुण रखता हैं , यदि चावल का सेवन करेगे तो शरीर में जल कि अधिकता हो जाएगी जिससे मनुष्य का मन चंचल हो जाएगा . चंचल मन होने से व्यक्ति का पूजा, उपवास  अथवा हवन में मन नहीं लगेगा और व्रत का फल नहीं मिलेगा तथा पाप और कष्ट भोगना पडेगा .

पूजा विधि कैसे करे क्या खाए क्या ना खाए 


श्री हरि देव का अर्थ तेज तत्व से है . श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए संध्या में हरि कीर्तन एवं विधिवत पूजा करनी चाहिए उनको पुष्प एवं पीले वस्त्र चढाने चाहिए उनकी लिर्जला उपासना करनी चाहिए पान इत्यादि का सेवन भी पूर्ण वर्जित है. किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ का  सेवन भी कने से बचना चाहिए, तामसी भोज भी पूर्ण वर्जित है.

Post a Comment

If you have any dought please let me know

Previous Post Next Post
close