Braham muhurat

जो लोग भी बीमारियों से मुक्त एक लंबी आयु पाना चाहते हैं ऐसे लोगों को ब्रह्म मुहूर्त के समय अवश्य उठना चाहिए. “आयुर्वेद” ब्रह्म मुहूर्त, चमत्कारिक पल या अमृत बेला सूर्य उदय से ठीक 96 मिनट पहले का होता है. इस चमत्कारिक समय जिसका ठीक से उपयोग करना अगर आप लोगों को आ जाये तो कुछ ही समय में आपकी लाइफ में आए changes, जिसको देखकर आप दंग रह जाओगे और आप अपने किसी भी dream को इतनी आसानी achieve कर लोगे जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा आप अपने skills में इतनी जल्दी मास्टर बन जाओगे जिसे देखकर आप खुद भी हैरान रह जाओगे कि कि ब्रह्म मुहूर्त में किया गया कोई भी काम ठीक उसी तरह से विकसित होता है जैसे कि पानी, खाद और सूरज की प्रजेंट में कोई पौधा, इसीलिए इस समय को The creators hours भी कहा गया है.
ब्रह्म मुहूर्त को हमारे हिंदू ,वेद पुराण और उपनिषद में बहुत महत्वपूर्ण जगह दी गई है यह मैं आपको मनुस्मृति से बताता हूं . हमें ब्रह्म मुहूर्त के समय उठकर मेडिटेशन और वेदों का ज्ञान लेना चाहिए. कठिन कहा जाने वाला वेदों का अध्ययन को महर्षि मनु ने ब्रह्म मुहूर्त के समय ग्रहण करने को कहा है तो इसके पीछे एक बहुत बड़ा रीजन रहा होगा और ना केवल हिंदू रिलिजन में बल्कि ऑलमोस्ट सारे रिलिजन में इस समय को प्रार्थना, स्टडी, मेडिटेशन, थिंकिंग प्लानिंग और लर्निंग के लिए इंपॉर्टेंट बताया गया है तो मैं आपको यह बताऊंगा कि इस समय के दौरान यूनिवर्स में ऐसा क्या होता है जो ब्रह्म मुहूर्त के समय को इतना पावरफुल बनाता है.
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1) ट्रेड लॉ ऑफ अट्रैक्शन 

यानी कि जैसा भी आप सोचोगे वैसा यह यूनिवर्स को बदले में देगा That is called law of attraction अब आप सोच रहे होंगे कि सोचता तो मैं दिन भर हूं लेकिन उसका ब्रह्म मुहूर्त से क्या लेना देना है.
Example:- आप कुछ देर के लिए ऐसा सोचे कि हमारे यूनिवर्स एक मोबाइल टावर है और हम सबके brain मोबाइल फोंस अब दिन के समय जब सब लोग जगे हुए होते हैं उस समय सब लोगों के ब्रेन यूनिवर्स में कोई ना कोई सिग्नल भेजते रहते हैं सिंगल से मेरा मतलब है अगर आप भी उस समय कोई इंपॉर्टेंट थॉट यूनिवर्स में भेजोगे तो उस थॉट को रियल लाइफ में मेनिफेस्ट होने में बहुत टाइम लगेगा लेकिन सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त के दौरान जब सब लोग सोए हुए होते हैं तब यूनिवर्स का फ्रीक्वेंसी लेबल बहुत कम होता है और उस समय सोची गई कोई भी थॉट के रियल लाइफ में मेनिफेस्ट होने के चांसेस बहुत बढ़ जाते हैं आप खुद ही सोचो कि अगर आपको किसी ए प्लस से बी प्लस पर दिन में ट्रैफिक के दौरान जाना है या फिर सुबह में 4:00 बजे के दौरान जाना है तो किस समय में आप अपनी डेस्टिनेशन पर सबसे जल्दी पहुंच जाओगे ओबेसली सुबह के समय ठीक उसी तरह ब्रह्म मुहूर्त के दौरान यूनिवर्स में थॉट्स का ट्रैफिक बहुत कम होता है और इस समय में सोची गई कोई भी थॉट के लिए

लाइफ में मेनिफेस्ट होने के चांसेस बहुत बढ़ जाते हैं इसलिए ऑलमोस्ट सारे Religion में सुबह की prayers को बहुत इंपॉर्टेंट बताया गया है ताकि दुआएं कबूल हो सके हां मैं जानता हूं कि हम लोगों को रात में जागना बहुत पसंद होता है इसलिए मैं आपको 3:00 बजे उठने के लिए नहीं बोल रहा हूं देखो अगर आप दिल्ली में रहते हो तो दिल्ली में सूर्य उदय 7:04 पर हो रहा है इस हिसाब से दिल्ली में ब्रह्म मुहूर्त 5:28 से शुरू होगा और 6:16 पर समाप्त हो जाएगा बस आपको इन 48 मिनट में जगे रहना है उसके बाद आप चाहे तो सो भी सकते हैं लेकिन इन 48 मिनट में आपको वह काम करना है जो आपके लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है. कुछ ही दिनों में आप अपनी आंखों के सामने अपनी लाइफ बदलते हुए देखोगे. 
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2) कॉस्मिक एनर्जी ( विश्व शक्ति )

क्या आप जानते हैं कि हिंदू स्क्रिप्टर्स के अनुसार हमारी रातें 4 कालो में डिवाइडेड होती है मान लो अगर सूरज 6:00 बजे अस्त होता है तो 6:00 से 9:00 बजे तक रूद्र काल इस समय के दौरान हमें कभी भी सोना नहीं चाहिए 9 से 12 राक्षस काल इस समय के दौरान हमें कभी भी जगे हुए नहीं रहना चाहिए 12 से 3 घंटे गंधर्व काल जब हमारी नींद सबसे ज्यादा गहरी होती है और तीन से छह मनोहर काल जिस समय के दौरान हमें हर हालत में बिस्तर छोड़ देना चाहिए क्योंकि मनोहर काल के दौरान हमारी इस यूनिवर्स में कॉस्मिक एनर्जी यानी कि विश्व शक्ति का संचार सबसे ज्यादा होता है विश्व शक्ति यानी कि ब्रह्मांडीक ऊर्जा हमारी दिवस को सुचारु रुप से चलाने का काम इसी कॉस्मिक एनर्जी का होता है जो हम सोते हैं उस दौरान हमारे शरीर में बहुत ही कम मात्रा में कॉस्मिक एनर्जी का प्रवेश होता है ताकि अगले दिन हम फ्रेश उठकर अपने दिन भर के काम कर सके लेकिन मेडिटेशन के दौरान हमारे ब्रह्मांड में बहुत अधिक मात्रा में कॉस्मिक एनर्जी देता है अब आप खुद सोचो कि मनोहर काल के दौरान तो पहले से ही हमारी यूनिवर्स में इतनी ज्यादा कॉस्मिक एनर्जी प्रजेंट होती है और उस दौरान किया गया मेडिटेशन इतना पावरफुल होता है कि आपको कुछ दिनों के अंदर ही स्पिरिचुअल एक्सपीरियंस शुरू होने लगेंगे आपकी विश्व शक्ति का लेबल इतना बढ़ जाएगा कि आप अपनी कॉन्शसनेस इंटेलिजेंट कंसंट्रेशन में इसका असर देखने लगेंगे आपने सबकॉन्शियस माइंड की पावर के बारे में तो पढ़ा या सुना जरूर होगा यही विश्व शक्ति हमारे सबकॉन्शियस माइंड को इतना पावर फुल बनाती है और इसलिए ज्यादा से ज्यादा कॉस्मिक एनर्जी पाने के लिए साधु योगी ब्रह्म मुहूर्त के दौरान मेडिटेशन करते हैं अब ऐसा बिल्कुल नहीं कि कॉस्मिक एनर्जी पाने के लिए आपको मेडिटेशन ही करना जरूरी है ना बिल्कुल नहीं अगर आप वर्तमान में रहना सीख लो तो भी आपको मेडिटेशन के बराबर ही कॉस्मिक एनर्जी मिलेगी बिलीव नहीं हो रहा तो खुद से चेक कर लो इस लेख को 1 मिनट के लिए रोक कर और वर्तमान मोमेंट में ध्यान लगाओ तो आप देखोगे दी प्रेजेंट मोमेंट आते ही आपका ध्यान सबसे पहले अपनी सांसो पर जाएगा जैसा कि हम मेडिटेशन के दौरान भी करते हैं मेरा कहने का मतलब बस इतना ही ब्रह्म मुहूर्त के दौरान हमारे यूनिवर्स में बहुत ज्यादा कॉस्मिक एनर्जी होती है और उस समय के दौरान कंसंट्रेशन के साथ किया गया कोई भी काम चाहे वह पढ़ाई हो मेडिटेशन हो या कुछ भी हो उस काम के रिजल्ट आपको एक्स्ट्राऑर्डिनरी ही मिलेंगे 

3) सर्केडियम रिदम 

जिस तरह से दिमाग और बॉडी एक दूसरे से इंटरकनेक्टेड होते हैं ठीक उसी तरह से हम और हमारा यूनिवर्सिटी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं आप तो जानते होंगे कि हमारी धरती सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाती है तो सुबह के समय जो सूरज की पहली किरण हमारी धरती पर पड़ती है तब सूरज के चार्ज पार्टिकल्स के चलते धरती बहुत पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड जनरेट करती है जिसके चलते हमारी बॉडी और दिमाग में बहुत सारे केमिकल रिएक्शन शुरू हो जाते हैं और हमारे ब्रेन का सुपर कैच मैटिक new-clause है बॉडी को सिग्नल देने लगता है कि बाहर की दुनिया में उजाला हो गया है और बॉडी उठने के लिए तैयार होने लगती है जैसे की बॉडी का टेंपरेचर गिरने लगता है ब्रैन का पीनियल ग्लैंड बहुत अधिक मात्रा में मेलाटोनिन रिलीज करने लगता है और यह सिस्टम लाखों सालों के इवोल्यूशन के बाद जाकर विकशीत हुआ है अब आपकी दोनों डायग्राम्स को देखिए पहला है सरकेडियम और दूसरा है आयुर्वेदिक दोसा टाइमिंग सुबह के 4:00 बजे हमारी बॉडी का टेंपरेचर सबसे कम उम्र में मेलाटोनिन का लेबल सबसे ज्यादा होता है और लगभग सुबह में 7:30 के आसपास हमारा ब्रेन मेलाटोनिन बनाना पूरी तरह से बंद कर देता है सुबह के समय ब्रेन में मेलाटोनिन का लेवल ज्यादा होने की वजह से दिमाग बहुत शांत और स्टेबल होता है जिसके चलते हमारे ब्रेन की कंसंट्रेशन और फोकस करने की एबिलिटी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है और वही अगर आयुर्वेद की बात करें तो हमारा शरीर इन फाइव एलिमेंट्स से मिलकर बना हुआ होता है और अर्थ, वॉटर, फायर, एयर और इथर है जिसे स्पेस भी कहते हैं और इन्हीं फाइव एलिमेंट से मिलकर हमारे शरीर की तीन मुख्य एनर्जी का निर्माण होता है वाता यानी की एयर एंड स्पेस, पिता यानी कि फायर, कपा यानी कि अर्थ एंड वॉटर, आयुर्वेद के अनुसार सुबह 2:00 से 6:00 और शाम को 2:00 से 6:00 के बीच हमारी बॉडी में वाता एनर्जी डोमिनेंट होती है और इस समय हमारे दिमाग की क्रिएटिविटी concentration और फोकस करने की एबिलिटी बहुत ज्यादा होती है इसलिए हमें इस समय में ज्यादा से ज्यादा मेहनत और करनी चाहिए ताकि हमारी प्रकृति भी आपका उस काम को करने में साथ दे सके.
Conclusion:  हमारा शरीर प्रकृति के बनाए नियमों के अनुसार चलना चाहिए लेकिन हम असल जिंदगी में करते क्या है वह हम सब जानते हैं उसे बताने की जरूरत नहीं है. आयुर्वेद के हिसाब से हमें 10:00 से 2:00 के बीच किसी भी हालत में जगे हुए नहीं होना चाहिए लेकिन आज की सोशल मीडिया के जमाने में 2:00 बजे से पहले सोता कौन है भाई देखो पानी जिस दिशा में बह रहा है अगर उस दिशा में बहोगे तो किनारा जल्दी मिल जाएगा यानी कि अगर आप नेचर और यूनिवर्स के हिसाब से चलोगे तो यह नेचर और ब्रह्मांड आपका साथ देंगे और किनारे की तरह आप अपनी लाइफ के सारे गोल्स बहुत आसानी से जीत कर पाओगे.

Purest environment:  

क्या आप जानते भी सुबह के समय यानी कि ब्रह्म मुहूर्त के समय हमारे आसपास का वातावरण अपने सबसे ताजा एवम शुद होता है सुबह के समय वातावरण में लगभग 41 परसेंट ऑक्सीजन और केवल चार परसेंट कार्बन डाइऑक्साइड होती है  इनकी मिनिमम पोलूशन अब आप यह सब तो जानते ही होंगे कि फ्रेश एयर में सांस लेने से सैकड़ों फायदे होते हैं जिसमें की सबसे बड़ा फायदा यह है कि फ्रेश एयर गिव्स यू मोर एनर्जी एंड शार्प रामायण अभी कैसे काम करता है इसके पीछे भी अपना एक विज्ञान है जिसके बारे में हम फिर कभी बात करेंगे

मिनिमम नॉइस पोलूशन 

क्या आप जानते हैं कि आपके आसपास की तेज आवाज ओक आप के दिमाग पर क्या असर पड़ता है अगर नहीं जानते तो आजा लीजिए हमारे आसपास की तेज आवाज हमारे ब्लड प्रेशर को इनक्रीस करती हैं जिससे दिमाग ठीक से concentrate और फोकस नहीं कर पाता . 

एनर्जी सेविंग 

महर्षी पतंजलि योगा सूत्र आई यम नियम आसन प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि में पांचवा अंग है प्रतिहार जिसका मतलब होता है कि हमारे पास है इसके थ्रू योर एनर्जी देश है उसे बचाना जिसमें एक योगी मेडिटेशन के दौरान अपने सारे सेंस इसको बंद कर लेता है ताकि वह अपने अंदर की सारी एनर्जी मेडिटेशन पर लगा सके अभियोग इसके पास एबिलिटी होती है वह अपनी इच्छा अनुसार अपने सेंस इसको बंद कर सकते हैं लेकिन आप लोगों के पास तो एबिलिटी है नहीं तो आप लोगों को अपने ब्रेन की एनर्जी का सदुपयोग करने के लिए सुबह के समय जब एनवायरनमेंट शांत हो उस समय उठकर कोई काम करना चाहिए देखो होता क्या है कि जब हमारे आसपास में विशेष होती हैं तब हमारी दिमाग की एनर्जी का एक बहुत बड़ा हिस्सा 19 इसको समझने में लगा रहता है चाहे फिर वह वॉइस अनइंर्पोटेंट ही क्यों ना हो इसलिए अगर आप सुबह के समय उठोगे शांत वातावरण के कारण आपका चेतन मन यानी कि conses mind जिससे हम सोचते हैं वह बहुत शांत रहेगा जिसके चलते उठने के 20 मिनट बाद तक आप जो भी करोगे वह डायरेक्ट ही आपके सबकॉन्शियस माइंड में जाकर बैठेगा और अगर एक बार आपने अपने सबकॉन्शियस माइंड में कुछ बैठा दिया तो दुनिया में ऐसी कोई भी ताकत नहीं है जो उस बात को सच होने से रोक सके तो आज से ही अपने आप से एक वादा करो कि मैं रोज सुबह 4:00 बजे उठूंगा चाहे यह दुनिया फिर इधर की उधर ही क्यों ना हो जाए और आपको कुछ दिनों तक ही करना है कुछ ही दिनों में आपका एनर्जी लेवल कंसंट्रेशन इतना बढ़ जाएगा आप दिनभर इतने फ्रेश और खुश रहने लगेगी कि फिर आपका कभी भी लेट तक सोने का मन ही नहीं करेगा .

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