Which are the popular stories related to Ganesha born

श्री गणेश जी रिद्दी और सिद्दी के दाता भगवान शिव जी और माँ पार्वती के पुत्र है.
श्री गणेश जी विघन्हर्ता है चूकि मनुष्यों के विघनो को हरते है इसीलिए इन्हें विघनविनायक भी कहा जाता है.
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श्री गणेशजी (Lord Ganpathi) कि जन्मकथा:-

एक बार जब सम्पूर्ण सृष्ठी से रिद्दी सिद्दी चली गयी तो पुरे ब्रह्माण्ड में घोर अँधेरा और अत्रिप्त्ता छा गयी उस समय lord Shiva घोर तपस्या में लीन थे जब कोई भी उपाय किसी को समझ नहीं आया तो माँ लछमी जी के उपयानुशार माँ पार्वती ने अपने शारीर के मैल से गणेश जी को उत्पन्न किया. वर्षो कि समाधी के पश्चात् जब शिव जी कैलाश पर्वत पर वापस लौटे और माँ पार्वती से मिलने उनके कच्छ कि तरफ जाने लगे तब द्वार पर खड़े गणेश जी ने उन्हें अन्दर जाने से रोका क्युकि माँ पार्वती ने उन्हें आदेश दिया था कि कोई भी मेरे अनुमति के घर में प्रवेश न कर सकेआग्यानुशार पालन करते हुए उन्होंने शिव जी को अन्दर जाने नहीं दिया . गणेश जी अनभिज्ञता के कारण शिव जी ने उनके शिर को धड से अलग कर दिया . गणेश जी को भूमि पर मृत देख माँ पार्वती विचलित हो गयी उन्होंने गणेश जी (Indian elephant god) को पुनः जीवित करने के लिय भगवान शिवजी से अनुरोध किया तत्पश्चात शिव जी ने गणेश जी (Ganpati bhagwan) के धड पर हाथी का सिर लगा दिया और प्रथम पूज्य का वरदान दिया.

 वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ, !

निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा !!

सिन्दूरं शोभनं रक्तं शौभाग्यम सुख्वर्धन्म,
शुभ्दम कामदं चैव सिन्दूरंप्रतिग्रहयातम !!

  
गणेश जी के पिता Lord Shiv और माता माँ पार्वती है . गणेश जी की दो पत्निया हैं जिनका नाम रिद्दी और सिद्धी हैंइनके दो पुत्र भी है जिनका नाम शुभ और लाभ है.

गणेश जी के बड़े भाई का नाम कार्तिकेयन है . गणेश जी कि बहन का नाम अशोक सुंदरी है. गणेश जी का प्रिय भोजन मोदक (लडडू) है इनको लाल रंग के पुष्प प्रिय हैं और वास्तु में इन्हें दूर्वा एवं शमी पत्र प्रिय है. इन्हें जल तत्त्व के अधिपति भी कहा जात है .प्रमुख अश्त्र पाश और अंकुश है तथा इनका वाहन मूषक है.

 Lord Ganesha को क्यों प्रिय है मोदक का प्रसाद ?


गणेश जी (Eco friendly Ganesha) की मोदक और लड्डू की पसंद के पीछे एक कहानी है. एक बार की बात है जब भगवान गणेश जी भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी से युद्ध कर रहे थे. लड़ाई के दौरान गणेश जी का दांत टूट गया और उन्हें खाने में दिक्कत होने लगी. इसके बाद उनके लिए स्वादिष्ट लड्डू और मोदक तैयार किए गएजो उनके मुंह में जाते ही घुल गए. विघ्नहार्ता गणपति (Vighnaharta Ganesha)  को यह बहुत पसंद आया और मोदक उनका प्रिय भोजन बन गया यही वजह है कि लोग गणपति चतुर्थी को विशेष रूप से लड्डू जरूर चढ़ाते हैं और प्रसाद के रूप में बांटते भी हैं. दरअसल ‘मोदक’ शब्द का अर्थ होता है ‘खुशी’जिसे खाते ही व्यक्ति प्रसन्न हो जाता है. इसे मराठी में मोदक कहते हैं. तेलगू में कोंकणीमोदकम या कुडूमू कहते हैं. कन्नड़ में मोदक या कडूबूमलयालम में कोझकट्टा या मोडकक्कम और तमिल में कोझुकाट्टई या मोडगम कहते हैं.

एक दन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननमं !

विघ्न नाश्कारमं देवं हेरम्बम प्राणमाम्यहम !!
  

मोदक बनानने के कौन कौन से तरीके है ?


सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध तरीका यह है कि चावल का आटा और गेंहू का आटा मिलाकरउसमें नारियलगुड़ और मेवे से भरकरभाप से पकाया जाता है. Lord Ganesh को बेशन के लडडू अति प्रिय हैं.


 एक मूषक कैसे गणेश जी का वाहन बना ?

आदि काल कि बात है सुमेरु पर्वत पर सौभरि ऋषि का बहुत ही मनोरम आश्रम था. सौभरि ऋषि कि धर्म पत्नी का नाम मनोमयी था. एक बार चुपचाप एक गन्धर्व जिसका नाम कौंच था ऋषि कि अनुपस्थ्ती में आश्रम आया और ऋषि पत्नी मनोमयी के साथ गलत व्यवहार किया जिससे ऋषि ने उस गन्धर्व को शराप दिया कि “तू चोर कि भाति मेरे आश्रम में आया और तूने एक निंदनीय कार्य करने कि चेष्टा कि अतः "मै  शराप देता हु कि तू मृत्यु लोक अर्थात धरती पर चूहे (मूषक) के रूप में जन्म लेगा और धरती के नीचे तेरा निवाश स्थान होगा और तू चोरी करके अपना पेट भरेगा ". तब कौंच नामक गन्धर्व ने उनसे बहुत अनुनय - विनय किया और साथ में माफ़ी मांगी जिससे ऋषि ने दया करते हुए कहा (वरदान दिया) कि तू शिव जी और माँ पार्वती के पुत्र ganpati bappa morya का वाहन बनेगा और तुझे डिंक नाम से पुकारा जायेगा.



  









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